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जम्बूद्वीप क्या है ? भारत को जम्बूद्वीप के नाम से क्यों जाना जाता है?

किस देश को जम्बूद्वीप के नाम से भी जाना जाता है, India is also known as Jambudweep 

जम्बूद्वीप क्या है? जम्बूद्वीप किसे कहते है ? Jambudweep kya hai ?

संस्कृत में जम्बूद्वीप का अर्थ है जहां जंबू के पेड़ Tree of Indian Blackberry उगते हैं। Ancient Time में भारतीयों द्वारा भारत को सूचित करने (Indicate) करने के लिए जम्बूदीप शब्द का उपयोग किया जाता है. कहीं कहीं लोग Jambudip and Jambudvip उच्चारण करते हैं। 

कहा जाता है कि भारत भूमि पे या भारतवर्ष में जन्म लेने के लिए प्राणी ही नहीं देवी- देवता भी लालाइत रहते हैं. इस देश में या इस धरती पर अनेकों पर्वत श्रृंखलाएं एवं नदियाँ विध्यमान हैं और उन पर्वतों पे और नदियों के तट पे बड़े बड़े ऋषि मुनि एवं आत्मज्ञानी अपने आश्रम बना कर निवास करते थे, कुछ तो आज भी रहते हैंl

भारतवर्ष एक कर्मप्रधान देश है और यहाँ जो जो जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। पुराणिक ब्रह्मांड शास्त्र के अनुसार, संपूर्ण ब्रह्मांड सात सांद्र द्वीप महाद्वीपों में बांटा गया है (divided into seven Concentric Islands)

सात घेरे वाले महासागरों से अलग, सभी पिछले वाले के Size से दोगुना आकर size का होता है (भीतर से बाहर की ओर ) पुराणों में वर्णित इन सात महाद्वीपों को जम्बूदीप, प्लाक्सद्वीप, सल्मालिद्वीप, कुसाद्वीप, क्रौनकाद्वीप, सकादिविप और पुष्करद्वीप कहा जाता है। सात मध्यवर्ती महासागरों में क्रमशः नमक-पानी, गन्ना का रस, शराब, घी, दही, दूध और पानी होता है।

जम्बूद्वीप महाद्वीप (Indian Blackberry Island)

जम्बूद्वीप को सुदर्शन द्वीप के रूप में भी जाना जाता है, उपर्युक्त योजना में सबसे समेकित द्वीप बनाता है। इसका नाम जंबू पेड़ (भारतीय ब्लैकबेरी के लिए एक और नाम) Generally हमलोग जम्बू को जामुन के नाम से जानते हैं. ऐसा विश्वास believe है की जिस जगह पे जंबू के पेड़ यानी जामुन के पेड़ ज्यादा होते थे इसलिए इस भू -भाग को जम्बूद्वीप कहा जाता था.

जंबू के पेड़ के बारे में विष्णुपुराण (च 2) में कहा गया है कि इसके फल हाथियों जितना बड़ा होता है और जब वे सड़ जाते हैं और पहाड़ों के ऊपर गिर जाते हैं, तो उनके व्यक्त रस से रस की एक नदी बनती है। इस तरह की नदी को जंबुनदी (जंबू नदी) कहा जाता है और जंबुद्वीप के तरफ से बहती है, जिसके निवासियों ने इसका पानी पीया है।

जैसा कि मार्कण्डेय पुराण में वर्णन है कि जम्बूद्वीप का प्रसार उत्तर और दक्षिण के बजाय मध्य क्षेत्र में ज्यादा था, और उस फैलाव क्षेत्र को मेरुवर्ष या इलावर्त के नाम से जानते थे. इलावर्त के केंद्र में पहाड़ों के राजा सुनहरे मेरु पर्वत है. मेरु पर्वत के शिखर पर, भगवान ब्रह्मा का विशाल शहर है, जिसे ब्रह्मपुरी के नाम से जाना जाता है। ब्रह्मपुरी के आस-पास आठ 8 और भी शहर हैं – जिसमें से एक भगवान इंद्र और सात अन्य देवताओं का है। 

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मार्कंडेय पुराण और ब्रह्मांड पुराण जम्बूद्वीप को चार विशाल क्षेत्रों में विभाजित करते हैं, जो कि आकर में कमल के चार पंखुड़ियों की सामान हैं, एवं मेरु पर्वत एक फली जैसे केंद्र में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मपुरी शहर नदी से घिरा हुआ है, जिसे आकाश गंगा कहा जाता है. आकाश गंगा को भगवान विष्णु के पैर से आगे से निकलता है और चंद्र क्षेत्र धोने के बाद “आसमान के माध्यम से” गिरता है और ब्रह्मपुरी को घेरने के बाद “चार शक्तिशाली धाराओं में विभाजित होता है”, जो चार विपरीत दिशाओं में बहता है ऐसा मानते हैं .

एक कथा के अनुसार महाराज सागर के पुत्रों द्वारा पृथ्वी को खोदने से जम्बूद्वीप में आठ अन्य उपद्वीप भी बन गए थे .

  • स्वर्णप्रस्थ
  •  चन्द्रशुक्ल
  •  आवर्तन
  •  रमणक
  •  मन्दहारिण
  •  पांच्यजन्य
  •  सिंहल  और
  •  लंका

वैसे यदि देखा जाय तो आज का भारतवर्ष जम्बूद्वीप से काफ़ी छोटा है, तब का भारतवर्ष में ही आर्यावर्त स्थित था. आज का हमारा भारत ना ही जम्बूद्वीप है न भारतवर्ष और ना हीं आर्यावर्त, हिंदुस्तान भी है तो आधा अधूरा.

इस्लाम धर्म और ईसाई धर्म की उत्पत्ति के पूर्व यह लिखित प्राचीन ग्रंथ के अनुसार :-

” हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थान प्रचक्षते॥- (बृहस्पति आगम)

अर्थात : हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है। यानी कि हिन्दुस्तान चंद्रगुप्त मौर्य के काल में था लेकिन आज जिसे हम हिन्दुस्तान कहते हैं वह क्या है?

धन्यवाद

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